“हमारे द्वारा इकट्ठी की गई किताबों से जब कोई जरूरतमंद बच्चों को पढता हुआ देखता हूं तो मुझे ऐसा महसूस होता है उस बच्चे के रूप में बार बार पढ़ रहा हूं” ~संदीप बडसरा~

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